





Dr. H P Narayan
मुख्य सलाहकार
डॉ. एच पी नारायण (Dr. H P Narayan) एक प्रमुख व्यक्ति हैं, जिनकी पहचान मुख्य रूप से रांची, झारखंड में एक प्रसिद्ध न्यूरोलॉजिस्ट (Neurologist) और न्यूरोसर्जन (Neurosurgeon) के रूप में है। वह चिकित्सा के क्षेत्र में एक अनुभवी और सम्मानित विशेषज्ञ हैं, जिनका अभ्यास समस्त भारत वर्ष जैसे क्षेत्रों में है। आपका संबंध जनजाति विकास परिषद ट्रस्ट, रांची (झारखंड) से भी है, जो आपके सामाजिक और सामुदायिक विकास के प्रति समर्पण को दर्शाता है।
Nisha Oraon (IRS)
मुख्य सलाहकार
निशा उरांव भारतीय राजस्व सेवा (IRS) की एक प्रमुख अधिकारी हैं, जिनकी पहचान न केवल उनकी प्रशासनिक दक्षता से है, बल्कि झारखंड में आदिवासी समाज के अधिकारों और कल्याण के प्रति उनके गहन समर्पण से भी है। प्रशासनिक करियर और महत्वपूर्ण भूमिकाएँ IRS अधिकारी के रूप में, उन्होंने रांची में अपर आयकर आयुक्त (छूट) जैसे महत्वपूर्ण पद पर कार्य किया है, जहाँ वह एनजीओ और राजनीतिक दलों के टैक्स छूट दावों का निर्धारण करती हैं। इससे पहले, पंचायती राज निदेशक के रूप में, उन्होंने राज्य में पेसा कानून (PESA Act) के नियमों का मसौदा तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जो झारखंड के जनजातीय क्षेत्रों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। कृषि निदेशक रहते हुए, उन्होंने ब्लॉक चेन तकनीक का उपयोग करके बीज वितरण में पारदर्शिता लाकर प्रशासनिक नवाचार का उदाहरण पेश किया। जनजातीय विकास और सामाजिक सक्रियता निशा उरांव का कार्यक्षेत्र केवल सरकारी कार्यालयों तक सीमित नहीं है। वह झारखंड के जनजातीय समाज से जुड़े मुद्दों पर मुखर रही हैं और उन्हें जमीनी स्तर पर समाधान करने का प्रयास करती हैं। आपकी जानकारी के अनुसार, वह जनजाति विकास परिषद ट्रस्ट, रांची (झारखंड) से भी जुड़ी हुई हैं, जो उनकी सामाजिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह जुड़ाव आदिवासी समुदायों के विकास और उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के उनके उद्देश्य को मजबूत करता है। वह सार्वजनिक रूप से PESA Act 1996 और JPRA 2001 जैसे कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन, ग्राम सभाओं के अधिकारों और भूमि अधिग्रहण जैसे संवेदनशील विषयों पर अपनी राय रखती हैं, जो जनजातीय अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक हैं।
हमारे प्रमुख कार्यक्रम
जनजाति विकास परिषद ट्रस्ट, रांची (झारखंड)
जनजाति विकास परिषद ट्रस्ट, रांची (झारखंड), एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) है जो मुख्य रूप से जनजातीय कल्याण और समाज सेवा के कार्यों से जुड़ा हुआ है। उपलब्ध सूचना के अनुसार, अर्जुन राम इस ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं, जिन्हें भाजपा नेता के रूप में भी जाना जाता है। इस संगठन की गतिविधियों में सामाजिक और कल्याणकारी कार्य शामिल हैं; उदाहरण के लिए, यह ट्रस्ट ठंड के मौसम में गरीबों और ज़रूरतमंदों को कंबल वितरित करने जैसे कार्यक्रम आयोजित करता है।
ट्रस्ट से जुड़े लोग या सहयोग करें।
(एं.पी.संख्या: 2022 / RAN/1077 / BK/4195 / UNIQUE ID OF NGO JH/2024/0384501
Darpan Reg. Date 20.1.24 – Pan No.: AAETJ1920C)
पता – वृंदा वन कॉलोनी, साइंस सिटी, बोडेया रोड राँची, झारखंड, पिन कोड – 834006
मोबाइल: 9931473754 , 9572685860, 9835151846 , 9835185166
जनजाति विकास परिषद ट्रस्ट, (झारखंड)
प्रधान सलाहकार – डॉ. एच.पी. नारायण
मुख्य सलाहकार – निशा उराँव
अध्यक्ष – अर्जुन कुमार राम
उपाध्यक्ष –
- रोहित प्रियदर्शी उराँव
- पृथ्वीराज मुखर्जी
- प्रबीन लकड़ा
सचिव
- संदीप उराँव
- रवि प्रकाश उराँव (सह)
कोषाध्यक्ष
- तुलसी प्रसाद गुप्ता
सदस्यगण
- विनोद कुमार साहू एडवोकेट
- ओम प्रकाश गुप्ता
- शिवशंकर साबू
- सुश्री अंजलि लकड़ा
- सुरेश लोहार
- सिकंदर मुंडा
- भुनेश्वर मुंडा
- बालेश्वर पहान
- सुलेमान मुर्मू
- राजकुमार शाह
- तुलसी कुमार महतो
- यादो उरांव
- धर्मेंद्र पोद्दार
- संतोष कुमार एडवोकेट
- अजय कुमार गुप्ता
- लक्ष्मी प्रसाद गुप्ता
मीडिया प्रबंधक
- Dr. GanduRa Oraon
जनजाति विकास परिषद् ट्रस्ट द्वारा झारखण्ड प्रदेश में योजना का क्रियान्वयन एवं लक्ष्य
- जनजाति विकास परिषद् ट्रस्ट द्वारा झारखण्ड प्रदेश में योजनाओं का क्रियान्वयन तथा लक्षित जनजाति कॉलेज की स्थापना एवं 51 आवासीय विद्यालयों का निर्माण।
- स्कूल एवं छात्रावास का निर्माण।
- मेधावी जनजाति छात्र-छात्राओं के लिए विशेष प्रशिक्षण की व्यवस्था तथा आर्थिक सहयोग प्रदान करना।
- स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता देते हुए गांवों में चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना।
- जनजातीय समाज के धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्वों और महोत्सवों का संचालन एवं संवर्धन।
- जनजाति बेरोजगार युवकों के लिए स्थानीय रोजगार की व्यवस्था करना।
- महिलाओं के कौशल विकास हेतु सिलाई प्रशिक्षण केंद्र एवं कंप्यूटर केंद्र की स्थापना।
- आदिम जनजातियों के बीच शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक कार्यों के माध्यम से उनका सर्वांगीण विकास करना।
- खेलकूद के माध्यम से जनजाति युवक-युवतियों को प्रोत्साहन एवं पहचान दिलाना।
- बुजुर्गों (पुरुष एवं महिलाओं) के लिए आश्रम का निर्माण।
- जनजाति कॉलेज की स्थापना एवं आवासीय विद्यालय खोलना।
- स्वास्थ्य सेवाओं की प्राथमिकता के साथ गांवों में चिकित्सा शिविरों का आयोजन।

























